रविवार का बोरियत भरा दिन होना था। इसलिए पहले ही तय कर लिया था कि इस बार रविवार को दिल्ली हाट (INA) में चल रहे भारतीय महिला उत्सव को देखने जाऊंगा। इसका एक मुख्य कारण यह भी था कि उत्तराखण्ड की किसान बिटिया "रंजना रावत" के स्टाल को देखना था।
कमल कुमार सिंह "नारद" को साथ चलने के लिए कह दिया था। ठीक बारह बजे कमल भाई को मधु विहार बस स्टैंड पर मिलने को कह दिया था। कमल भाई 12.15 पर चिर परिचित काला चश्मा लगाकर उपस्थित हो गए। बस नंबर 727 पकड़ी और मेडिकल उतर गए। दिल्ली हाट पहुँचकर टिकिट खरीदकर अन्दर पहुँचे। किसान बिटिया का जो स्टाल नम्बर मुझे बताया गया था वो पूरे दिल्ली हाट के कई चक्कर काटने के बाद भी नहीं मिला।
विभिन्न राज्यों की महिलाओं द्वारा किए जा रहे कई अभूतपूर्व कार्यों को एक ही जगह पर देखना अदभुत था। उत्तराखण्ड के भी कुछ स्टाल दिखे तो उनको भी देखा गया। कुछ फ़ोटो खींची। भूख लगी तो बिहार का प्रसिद्द लिट्टी चोखा खाया। महंगा बहुत लगा, सौ रुपये की दो लिट्टी पकड़ा दी। दो लिट्टी से हम दोनों का क्या होना था। राजस्थानी स्वाद भी लगे हाथों चख लिया जाए।
यही सोचकर राजस्थानी कचोड़ी और एक बड़ी वाली मिर्च का पकोड़ा ले लिया। यहाँ भी वही लूट मची दिखी। एक कचोड़ी पचास रूपए की और एक मिर्च का पकोड़ा भी पचास रुपए का। स्वाद भी कहीं से राजस्थानी नहीं लगा। मैं बीकानेर की कचोड़ी कभी नहीं भूल सकता जो वहां खाई थी। बिना बात के दो सौ रुपए बर्बाद हो गए।
दो घण्टे दिल्ली हाट में बिताने के बाद वापिस घर की ओर रवानगी की गयी। पाँच बजे घर भी पहुँच गया। जितनी उम्मीद थी वैसा खास कुछ तो देखने को मिला नहीं, हाँ फोटोग्राफी के हिसाब से अच्छा दिन था। कुछ फ़ोटो आप भी देखिये।














सूंदर चित्रों के साथ एक बढ़िया लेख ��
ReplyDeleteधन्यवाद महेश जी।
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