Sunday, 30 July 2017

कोसी नदी

कोसी नदी



रामनगर के नजदीक जिम कार्बेट नेशनल पार्क जो भी घूमने जाता है तो गर्जिया देवी मन्दिर में दर्शन हेतु जरूर जाता है। साथ ही कोसी को भी जरूर निहारता है। कोसी नदी की विशेषता है कि इसका किसी भी नदी में संगम नहीं होता। इस नदी के पीछे किंवदन्ती है कि ये सात बहनें थीं। भागीरथी, यमुना, सरयू, रामगंगा, काली, गोरी और कोसी। ये सातों बहनें आपस में खूब हंसी ठिठोली करती और साथ-साथ खेलती थी। एक बार सातों बहनों ने निश्चय किया कि हम सभी साथ-साथ निकलेंगी और बीच में सभी एक दूसरे के साथ ही चलेंगी। जब चलने की बारी आई तो कोसी सबसे पहले पहुँच गई। उसने देखा अभी बाकी छह बहने नहीं आई तो अकेले ही आगे निकल पड़ी। जब बाकी छह बहने उस स्थान पर एक साथ पहुंची जहाँ से निकलना था तो देखा कोसी वहां पर नहीं है और आगे निकल चुकी है। छहों बहनों ने गुस्से में कोसी को श्राप दे दिया कि तू हमेशा अकेले ही बहेगी हमको कभी नहीं मिलेगी, तू बहुत आवाज करेगी, तुझमें मनुष्य बहेंगे और तू किसी में नहीं समाएगी।

बरसात के मौसम में यात्रा और सावधानियां

 बरसात और पहाड़


दोस्तों बरसात का मौसम जैसे ही आता है, चारों ओर से खबरें आने लगती हैं कि यहां बाढ़ आयी है, कहीं लैंड स्लाइड हो गया है, कहीं मकान ढह गये हैं तो कहीं सड़कें बन्द पड़ी हैं आदि आदि। कुल मिलाकर अधिकतर खबरें डरावनी ही होती हैं। ऐसे में लगता है कि कहीं घूमने जाने की सोचना ही बेवकूफी है। कुछ हद तक सही भी है, लेकिन पूर्ण रूप से नहीं।