Saturday, 19 November 2016

रिंगाल (मधुमक्खी) का पेथण (छत्ता)

रिंगाल (मधुमक्खी) का पेथण (छत्ता)
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गाँव में हमारे घर में एक दीवार पर सामान रखने के लिए बड़ा सा छेद बनाया जाता है। पहाड़ के घरों की दीवारें काफी चौड़ी होती हैं, जिससे उस छेद में काफी सामान आ जाता है। जिसको गढ़वाली में "आला" कहते हैं। उस आले के अन्दर भी एक छोठा सा छेद था जो दीवार के आर-पार था।

Thursday, 17 November 2016

डाडामंडी का गेंद का मेला (गिंदी कौथिग), Gend Mela in Uttrakhand

डाडामंडी का गेंद का मेला (गिंदी कौथिग):- 

बचपन की एक याद साझा कर रहा हूँ। जब छोठे थे तो प्रत्येक वर्ष जितना होली, दीवाली और किसी भी त्यौहार का इन्तज़ार रहता था उतना ही या उनसे भी ज्यादा इन्तज़ार होता था डाडामंडी (पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड) में होने वाले गेंद के मेले का। 
प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति को होने वाले इस मेले की तब अदभुत छठा होती थी। कई दिन पहले से मेले में जाने की तैयारी शुरू हो जाती थी। माँ हर साल की तरह अपने हाथों से नया स्वेटर बुन कर रखती थी। उस स्वेटर का उदघाटन भी मेले वाले दिन से ही होता था। एक बार की याद है, मैंने माँ को कहा था कि मुझे इस बार मेले में पहनने के लिए जैकेट चाहिए। माँ ने ऊन की जैकेट ही बुन डाली थी। ठीक जैकेट के जैसी। जिसमे दोनों ओर जेब भी थी जिनमे मूंगफली रख कर खाई जा सकती थी। मैं पूरे मेले में दोनों जेबों में मूंगफली रख कर बड़े गर्व से जैकेट पहन के घूम रहा था।

Monday, 14 November 2016

My Trekking Shoes मेरे ट्रैकिंग जूते


ट्रैकिंग जूतों के बारे में मेरी राय :-



ऐसे तो ट्रैकिंग अपने आप में बहुत बड़ा विषय है, साथ ही इसके लिए प्रयुक्त होने वाली सामग्री भी भिन्न-भिन्न प्रकार की हैं। बाजार में कई प्रकार के ब्रांड उपलब्ध हैं, लेकिन मैं स्वयं जो भी सामान ट्रैक के लिए उपयोग करता हूँ, उसके अनुभव साझा करना चाहता हूँ।