रिंगाल (मधुमक्खी) का पेथण (छत्ता)
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गाँव में हमारे घर में एक दीवार पर सामान रखने के लिए बड़ा सा छेद बनाया जाता है। पहाड़ के घरों की दीवारें काफी चौड़ी होती हैं, जिससे उस छेद में काफी सामान आ जाता है। जिसको गढ़वाली में "आला" कहते हैं। उस आले के अन्दर भी एक छोठा सा छेद था जो दीवार के आर-पार था।
एक बार माँ ने आले में गुड़ रख दिया। ना जाने कहाँ से एक मधुमक्खी को गुड़ की खबर लग गई। दो दिन बाद देखा तो मधुमक्खियों (रिंगाल) ने उस आले के अन्दर ही अपने छत्ते का निर्माण कर दिया। चूँकि मधुमक्खियां अपने में मस्त रहती थी और उनका छत्ते तक आने जाने का रास्ता वो दूसरा छोठा छेद था तो हमें भी कोई परेशानी नहीं होती थी।
कुछ महीने तक सब कुछ सामान्य चलता रहा। इधर रिंगाल अपने काम में व्यस्त उधर हम अपनी दिनचर्या में व्यस्त। मैं जब हॉस्टल से छुट्टियों में कुछ महीने बाद गाँव आया तो मालूम पड़ा उस छत्ते में खूब शहद हो रखा है।
अब इंसानी प्रवृत्ति कहाँ शान्त रह सकती थी। हमारे एक ताऊजी थे उनको शहद निकालने के लिए बुला लिया गया। ताऊजी ने कमरे को बंद करके धुआं आदि किया जिससे मधुमक्खियां भाग जाएँ। आखिर एक पतीले में काफी शहद निकल गया। हाँ एक दो डंक ताऊजी के हाथों में भी पड़े थे आखिर रिंगालो ने स्वामिभक्ति का परिचय तो कहीं न कहीं देना ही था।
अब जब छत्ता ही नहीं रहा तो रिंगाल भी उस आले से भाग गए। शायद रिंगालों की महारानी जी को ये एहसास हो चुका था कि उसने इंसानी बस्ती में घर बना लिया था। लेकिन भगवान ने इंसान को सबसे चतुर ऐसे ही थोड़ी बनाया है। माँ ने फिर से एक गुड़ की डली उसी आले में रख दी।
(नोट:- रिंगाल, ततेयां, म्वार आदि एक ही प्रजाति के हैं। सांकेतिक रूप से रिंगाल का प्रयोग किया गया है.)
(नोट:- रिंगाल, ततेयां, म्वार आदि एक ही प्रजाति के हैं। सांकेतिक रूप से रिंगाल का प्रयोग किया गया है.)
Ha ha .. Mouth Watering post dada.. Im aware of that place...Deepak Naithani
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