बरसात और पहाड़
दोस्तों बरसात का मौसम जैसे ही आता है, चारों ओर से खबरें आने लगती हैं कि यहां बाढ़ आयी है, कहीं लैंड स्लाइड हो गया है, कहीं मकान ढह गये हैं तो कहीं सड़कें बन्द पड़ी हैं आदि आदि। कुल मिलाकर अधिकतर खबरें डरावनी ही होती हैं। ऐसे में लगता है कि कहीं घूमने जाने की सोचना ही बेवकूफी है। कुछ हद तक सही भी है, लेकिन पूर्ण रूप से नहीं।
दोस्तों बरसात का मौसम जैसे ही आता है, चारों ओर से खबरें आने लगती हैं कि यहां बाढ़ आयी है, कहीं लैंड स्लाइड हो गया है, कहीं मकान ढह गये हैं तो कहीं सड़कें बन्द पड़ी हैं आदि आदि। कुल मिलाकर अधिकतर खबरें डरावनी ही होती हैं। ऐसे में लगता है कि कहीं घूमने जाने की सोचना ही बेवकूफी है। कुछ हद तक सही भी है, लेकिन पूर्ण रूप से नहीं।
पहाड़ों के परिपेक्ष्य में एक बात यह है कि पहाड़ों की असली खूबसूरती तो बरसात में ही निखर कर बाहर आती है। चारों ओर हरियाली, सफेद कोहरे की चादरों में लिपटे हुए पहाड़, इंद्रधनुष, जगह-जगह बहते हुए झरने, सूखी नदियों में पानी बहता हुआ वगैरा वगैरा, ये सब आपको बरसात में ही देखने को मिलेंगे। कभी कभार किस्मत अच्छी हो तो इंद्रधनुष तो फिर भी किसी और मौसम में दिख जाएगा लेकिन बाकी सब तो बरसात के मौसम में ही देखने को मिलेंगे।
अक्सर इंटरनेट पर बेहद हरियाली युक्त पहाड़ की तस्वीरों को आपने देखा होगा, देखते ही सीधे आह निकलती है। ये अधिकतर तस्वीरें बरसात के मौसम की ही होती हैं। अन्यथा गर्मियों में कहां ये सब मिलता है। जिन लोगों ने ये तस्वीरें खींची हैं अगर ये भी इन्ही सब डर की वजह से घरों से बाहर ही नहीं निकलते तो कहां से हम ये सब देख पाते। पहाड़ों पर अधिकतर जो भी हादसे होते हैं वो प्राकृतिक आपदा से कम व बेवकूफियों की वजह से अधिक होते हैं।
अगर समझदारी से व प्रकृति का सम्मान करते हुए घुमा जाए तो इस मौसम में भी घूमने का आनंद लिया जा सकता है। कुछ बातें हैं जिन्हें अपने अनुभव के आधार पर लिख रहा हूँ, जिनका कि हम पहाड़ी अक्सर ध्यान रखते हैं, आप भी ध्यान रखें तो शायद कभी न कभी काम आ ही जाएं :-
1. बरसात में पहाड़ों पर अगर मुख्य मार्गों पर यात्रा कर रहे हैं तो ही अपने वाहन से यात्रा करें अन्यथा पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस समय सर्वोत्तम साधन है सफर करने के लिए। अगर कहीं लैंड स्लाइड की वजह से फंस गए तो आप अपना वाहन छोड़ कर कहीं नहीं जा सकते जब तक कि सड़क साफ न हो जाये। पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर कर रहे होंगे तो आपके पास ऑप्शन रहता है कि आगे बढ़ सकते हैं।
2. समझदार बनें, चतुर नहीं। स्थानीय निवासियों से मौसम, सड़क की स्थिति आदि के बारे में जानकारी जरूर लेते रहें। पहाड़ी लोग सीधे-साधे ही मिलते हैं इसलिए उन पर विश्वाश किया जा सकता है। कुछ चतुर इस बात को नहीं मानेंगे, यही चतुराई उनको अक्सर फंसाती है।
3. पहाड़ में विशेषकर बरसात के समय नदी के किनारों पर अधिक समय बिताने से बचें। बरसात के समय नदी का जलस्तर कब अचानक से बढ़ जाए कुछ नहीं कहा जा सकता। अधिकतर टी.वी. पर हमने नदियों में फंसे लोगों को देखा ही है, 90% लोग पिकनिक मनाने के चक्कर में ही फंसते हैं।
4. रिमझिम बरसात अक्सर लंबे समय तक चलती है, हमको इसका आंकलन करना आना चाहिए, नहीं कर पा रहे तो स्थानीय लोगों से पूछ लेना चाहिए कि आपको क्या लगता है ये बारिश कितनी देर तक चलेगी ? यकीन मानिए उनका अनुमान काफी हद तक सटीक होता है।
5. मुख्य मार्गों से हटकर यात्रा करें तो दिन के समय ही यात्रा करें व बाकी मौसम में यात्रा पर लगने वाले समय से अतिरिक्त समय लगेगा यही मानकर निकलें। रात के समय यात्रा न करें, कहीं फंस गए तो भालू, तेंदुए और अन्य जानवरों के सिवा पहाड़ों पर बरसात में रात को कुछ भी बाहर नहीं निकलता। दिन के समय विपरीत परिस्थितियों में कुछ न कुछ मदद मिल ही जाती है।
6. बरसात के समय चूंकि पहाड़ों पर खेती अच्छी होती है, सब्जियां घरों के नजदीक खेतों में खूब होती हैं तो जंगली जानवर भी आबादी के निकट आ जाते हैं, इसलिए सावधानी अति आवश्यक हो जाती है।
7. लैंड स्लाइड जोन पर ब्यर्थ समय न बिताएं व डेयरडेविल बनने की कोशिश न करें। जल्दी से जल्दी ऐसे क्षेत्र को पार कर आगे निकल जाएं। कई बेवकूफ ऐसी जगहों पर सेल्फी के चक्कर में लगे रहते हैं व अगले दिन उनकी फोटो सीधे अखबार में ही छपती है।
8. बरसात में कपड़ों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। कोशिश कीजिये बदन पर पहने कपड़े भीगे नहीं। अगर भीग जाते हैं तो अधिक देर तक गीले कपड़ों में न रहें, जल्दी से जल्दी सूखे कपड़े बदल लें। बरसाती अवश्य ही पास में होनी चाहिए। कमर से नीचे के कपड़े तो गीले भी चल जाएंगे लेकिन ऊपर के कपड़े गीले कतई न हों।
9. मोबाइल, कैमरा, पैसे आदि को भीगने से बचाने के लिए अतिरिक्त प्लास्टिक की पन्नियां जरूर साथ में रखें, विपरीत परिस्थितियों में ये सब जीवनरक्षक साबित होते हैं।
10. कहीं जंगलों में फंस ही जाएं तो सर ढकने के लिए कुछ न कुछ सुरक्षित ठिकाना तलाश कर लें व जब तक बारिश बन्द न हो जाये इंतज़ार करें। 3 दिन तक आप पानी के सहारे जीवित रह सकते हैं। और पानी फ्री का बरस ही रहा है, लेकिन बरसात में जंगल-जंगल भटकना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं माना जाता।
ऐसी कई छोटी-छोटी बातें हैं जिनका ध्यान रखा जाए तो सुरक्षित घूमा जा सकता है व प्रकृति की खूबसूरती का आनन्द लिया जा सकता है। फिर प्रकृति की सुंदरता का रसपान करने के लिए थोड़े बहुत कष्ट तो उठाने ही पड़ते हैं। लेकिन प्रकृति का सम्मान करते हुए उसी के अनुरूप स्वयं को ढालकर जिया जाए तो राहें आसान हो जाती हैं।
खूब घुमक्कड़ी हो लेकिन सुरक्षित घुमक्कड़ी हो।

बहुत ही उम्दा जानकारी है भैजी
ReplyDeleteबेहतरीन
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