कोसी नदी
रामनगर के नजदीक जिम कार्बेट नेशनल पार्क जो भी घूमने जाता है तो गर्जिया देवी मन्दिर में दर्शन हेतु जरूर जाता है। साथ ही कोसी को भी जरूर निहारता है। कोसी नदी की विशेषता है कि इसका किसी भी नदी में संगम नहीं होता। इस नदी के पीछे किंवदन्ती है कि ये सात बहनें थीं। भागीरथी, यमुना, सरयू, रामगंगा, काली, गोरी और कोसी। ये सातों बहनें आपस में खूब हंसी ठिठोली करती और साथ-साथ खेलती थी। एक बार सातों बहनों ने निश्चय किया कि हम सभी साथ-साथ निकलेंगी और बीच में सभी एक दूसरे के साथ ही चलेंगी। जब चलने की बारी आई तो कोसी सबसे पहले पहुँच गई। उसने देखा अभी बाकी छह बहने नहीं आई तो अकेले ही आगे निकल पड़ी। जब बाकी छह बहने उस स्थान पर एक साथ पहुंची जहाँ से निकलना था तो देखा कोसी वहां पर नहीं है और आगे निकल चुकी है। छहों बहनों ने गुस्से में कोसी को श्राप दे दिया कि तू हमेशा अकेले ही बहेगी हमको कभी नहीं मिलेगी, तू बहुत आवाज करेगी, तुझमें मनुष्य बहेंगे और तू किसी में नहीं समाएगी।
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