घूमने के मामले में हर एक इंसान का अपना-अपना तरीका व नजरिया है। किसी को अकेले घूमना पसन्द है तो किसी को दोस्तों के साथ व किसी को परिवार के साथ। जहां तक मेरी बात है, मैं अक्सर दोस्तों के साथ ही घूमने निकलता हूँ। कोशिश रहती है उसके साथ घूमने जाऊं जिससे मेरे विचार, खान-पान, घूमने की चॉइस सभी मेल खाते हों।
मेरी अधिकतर घुमक्कड़ी पहाड़ों व हिमालय की ही होती है तो अधिकतर हिमालय प्रेमी या ट्रैकिंग प्रेमी ही साथ होते हैं। लेकिन जरूरी नहीं होता कि जो हिमालय प्रेमी या ट्रैकिंग प्रेमी हो उससे मेरे विचार मिले ही। ये मैं आम परिपेक्ष्य में कह रहा, जो भी मेरे मित्र हैं वो यह न समझें कि उनमें से किसी के लिए भी यह लिखा है।
असल में जो मुझे खाने में पसन्द है जरूरी नहीं है कि साथी को भी वह पसन्द हो। मुझे मैगी बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती, लेकिन ट्रैकिंग पर मैगी ही वो चीज है जो सीमित संसाधनों में सबसे आसानी से पक जाती है तो मन मारकर ठूंसनी पड़ती है। वहीं कई मित्र बड़े चाव से खाते हैं। वहीं मैं मांसाहारी हूँ, जबकि मेरे कई मित्र खाना तो छोड़ो छूते भी नहीं हैं। कई बार व्यवहार की बात भी सामने आ जाती है। किसी को हंसी मजाक पसन्द है तो किसी को नहीं। कई बार हम सड़क मार्ग से यात्रायें कर रहे होते हैं तो कोई जगह ऐसी दिख जाती है जहां रुकने का मन करता है, लेकिन जरूरी नहीं होता कि आपके साथी का वहां रुकने का मन करे।
परिवार के साथ जो लोग यात्राएं करते हैं उन्हें तो शायद ही इस प्रकार की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता होगा, लेकिन जो अक्सर किसी न किसी मित्र के साथ यात्रा करते हैं उन्हें इस प्रकार की परिस्थितियों का अनुभव अवश्य होगा।
मेरी नजर में एक घुमक्कड़ को हर परिस्थिति में स्वयं को ढालने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।अगर थोड़े से स्वयं के साथ समझौते से अपने साथी से किसी भी प्रकार के वाद विवाद से बचा जाए तो घूमने का आनन्द कई गुना बढ़ जाता है। अगर यात्रा के दौरान किसी भी साथी से थोड़ा सा भी वाद-विवाद हो जाए तो घूमने का कभी भी आप सही से आनन्द नहीं ले पाएंगे।
अक्सर वाद-विवाद शुरू भी छोटी-छोटी और बचकानी बातों से ही होता है। अगर थोड़ा सा झुकने से व साथी की इच्छा का सम्मान करने से यात्रा सुखद हो सकती है तो कर लेना चाहिए। जैसा मैं कह चुका कि एक घुमक्कड़ को समझौतावादी होना ही चाहिए, फिर भी कहीं भी किसी के साथ भी घूमने जाएं तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
1. साथी की राय का सम्मान करें, अपनी बात को जबरदस्ती थोपने के बजाय उसको सहमत करवाएं।
2. अगर साथी को कुछ खाने से परहेज है तो उसका सम्मान करें।
3. आपकी किसी बात से साथी गुस्सा है तो उसके गुस्से को शांत होने देने का इंतजार कीजिये न कि बहसबाजी में पड़ें।
4. राजनीतिक चर्चा कभी न करें। सबसे ज्यादा लड़ाई इसी को लेकर होती हैं।
5. थोड़ा झुकने से बात बन सकती है तो झुकने में कोई हर्ज नहीं। चाहे आपके विचार भिन्न हों।
6. खर्च का पूरा हिसाब रखें व आपस मे बराबर बाटें।
7. जाति, धर्म, धार्मिक भावनाओं पर टिप्पणियों से बचें।
8. सबसे अच्छा तो यह है कि यात्रा उसी के साथ करें जिससे विचार मिलते हों, और जिससे आप पहले से भलीभांति परिचित हों। अगर विचार नहीं मिलते तो साथ घूमने का कोई औचित्य नहीं है।
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